प्रिय भारतवासियों, हर रात हम टीवी खोलते हैं इस उम्मीद में कि देश के मुद्दों पर साफ और समझदार चर्चा सुनने को मिलेगी। लेकिन हमें क्या मिलता है? शोर। चिल्लाहट। तथ्यों से भागना। व्यक्तिगत हमले। कुछ प्रवक्ता ऐसे दिखाई देते हैं जिन्हें विषय की बुनियादी जानकारी तक नहीं होती। फिर भी वे पूरे आत्मविश्वास से गलत बातें दोहराते रहते हैं। सवाल पूछा जाता है कुछ और, जवाब मिलता है कुछ और। क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही राजनीतिक समझदारी है? सबसे “घटिया” प्रवक्ता वह है — जिसे मुद्दे की समझ नहीं है जो सवालों से बचने के लिए आवाज़ ऊँची करता है जो दूसरों को...